स्कोलल

गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

जाग तू जनता जाग...!

जनता को जगाने का मंत्र…!
(जागर)

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हे…
जाग रे जाग!
बिना मास्टरों का स्कूल मा जाग!
बिना डॉक्टरों का अस्पताल मा जाग!
बांजा पड़ी खेती-बाड़ी में जाग!
खंडर हव्यां कुड़ों में जाग!
बेरोजगार नोनी-नोन्यालों का फ्यूचर में जाग!
लालबत्ती-दायित्यधारियों का हूटर में जाग!
पराबेट स्कूलों की फीस में जाग!
पराबेट हास्पिटलों की तीस में जाग!
ठेकदारों का राज-पाठ में जाग!
अफसरों का ठाट-बाट में जाग!
नेताओं की काटम-काट में जाग!
यों की चाटम-चाट में जाग!
घातम-घात में जाग!
लठम-लठ्योड़ में जाग!
कुतम-कुकरियोल में जाग!
पर जाग!
जाग तू जनता जाग!
जाग-जाग!
तब्बि त खुलला त्यारा भाग!

चुनौं कु बकत च जाग!
वोट कु बकत च जाग!
अपणु वोट रखण तें जाग!
वोट कु मान रखण तें जाग!
जाग-जाग!
जाग तू जनता जाग!
तब्बि त खुलला त्यारा भाग!

हे…!
यख म धर!
वख म धर!
अपणु वोट धर!
अब जा घर!
कुछ भी कर!
पर न खा म्यार ख्वर…!
पर कब तक?
अब ऐ गै बकत!
तू वोट धर!
वख धर!
जख आयाराम-गयाराम न हो!
दल-बदल न हो!
टिकटों तें मारामार न हो!
चाटा-चाट न हो!
अफसरों की कमीशनखोरी न हो!
ठेकेदारों की बंदरबाट न हो!
माफियाओं कु राज न हो!

हे…
भाग रे भाग!
खनन का माफिया!
शराब का माफिया!
एजुकेशन सेक्टर का माफिया!
हॉस्पिटल का माफिया!
प्रापर्टी डीलिंग का माफिया!
अख़बारों का माफिया!
गीत-संगीत का माफिया!
जंगलों का माफिया…!
माफिया ही माफिया!
जख देखा तख माफिया!
भविष्य बताण वाला माफिया!
माफियाओं की बणी च सरकार!
यूं सरकारों तें उलट द्या!
पलट द्या!
अपणा उम्मीदवारों तें वोट द्या!
निर्दलीय उम्मीदवारों तें वोट द्या!
क्षेत्रीय दलों तें वोट द्या!
वोट से पैली जाग…!
जाग तू जनता जाग!
तब्बि त खुलला त्यारा भाग!

हे…!
बडा-बौड़ी जाग!
काका-काकी जाग!
दीदी-भुली जाग!
भैजी-भुला जाग!
जाग जाग!
जाग तू जनता जाग!
तब्बि त खुलला त्यारा भाग!

© महेन्द्र सिंह राणा  'आजाद'