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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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रविवार, 10 नवंबर 2013

आपदा आsणी, आपदा आsणी !





थाती गौं छौड़ी के

लटी-पटी करी के

जुं बस्या आज गाढ़s छाला

संस्कृति-संस्कार पैली इनोन ही बिसराई

द्वी दिन पौs-पुज्यै, बौs-बरात अर कौs-कारज मा गौं के

सीदा-सादा गौं वलु तें बिरड़ियाई

कि 's सारा गंवार चा'

बोsली के सारु कु निरछट करी

ताsबे आज हर चौsमास

गंगsजी छाँटी-छाँटी के लिजाणी

ताs अजी बुणा कि

आपदा sणी बल आपदा sणी !”

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महेन्द्र सिंह राणा आजाद