स्कोलल

गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

What is website hosting

रविवार, 14 जुलाई 2013

नि ज्याणी !



नि ज्याणी
कऽति ह्यूँद, चौमास
रुड़ियोँ का दिन
अर बरखा-बत्वैणी
उमस्यैऽड़ी रात
त्यारा औणऽक जग्वालऽम्‌ काटी मिन
पर आज
द्वि घड़ी
बिन त्यारा बौड़ऽये सि जाँदू !
यू त्यारु मिलणू कु असर च या
मेरु मन कु भरऽम
पर बात क्वी भी हो
त्वै दगड़ा रै के
छपछपी सि पड़ी जाँदी
त्वै बगैर अब
बिन पाणीक माऽछु जनी तड़पी जाँदु !

महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
©सर्वाधिकार सुरक्षित