स्कोलल

गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

What is website hosting

रविवार, 5 अगस्त 2012

पैली किले नि बगाई !

"अब देख्याली ना
क्या ह्वै गै
सैरी कुड़ी-बाड़ी
गंगा जी ली गै

जु रखदा हम
गंगा जी तेँ बचै के
त गंगा जी भी
माया लगांदी छणमणे के

कै क क्या, कै कु कन
जनी बूतला त वनी खाला
जु कुछ देखी ब्यायी-परसी
क्या भौऽड़ भी इनी चाला

अपणी गात पर लगायुँ डाम
त ल्वै भी अपणी ही बौगेली
अबी भी बगत छैँ च
नै त यु कोऽढ़ जन सौरेली

अब क्या हैरणु वख
सब अपणी पोटगी च देखणा
ये बिपदा का सोरु ले कै
अपणी जिबड़ी चा चटकाणा

कैँ गौ क्या कसूर
सब्यून भल बिगांई
पर जब ल्वै बगण छैँ च द
पैली किले नि बगाई।"
महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
©सर्वाधिकार सुरक्षित
Date- ५/०/२०१२