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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

कुहेड़ी !





 १.
"सर्रर सर्रर
कुहेड़ी ऐन

सौण-भादो की
फर्रर फर्रर
बथौन
सब उड़ै गै,

जौँ क
मन मा लगी
बारामासी कुहेड़ी
कु बथौ आलु
उड़ै लिजालु सदैनी।"

 २.
"आ कुहेड़ी
लुकै दे
पिरथी सैरी,
कुनजरीयोँक नजर से
कुछ देर त बची रैली।"

 ३.
"कुहेड़ी
जब चलदी
सैड़्यी रैँद धरती
मन मा
लगी कुहेड़ी
हमेश जिकुड़ी जलांदी
हमेश मनखी तपाँन्दी।"


महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद' 
© सर्वाधिकार सुरक्षित
दिंनाक- १२/०७/२०१२