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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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रविवार, 15 जुलाई 2012

नांगी पिरथी ढ़काणी ! (गढ़वाली गजल)



"चौमासी कुहेड़ी नांगी पिरथी ढ़काणी
धरती की लाज अब नि रै बिराणी॥१॥

द्वी-चार मैना यी कुहेड़ी ढ़काली
आवा अग्वाड़ी अब हमुन भी बचाणी॥२॥

चौमासी कुहेड़ी द्वी-चार मैना ही राली
धै लगावा अब त बारमासी खुज्याणी॥३॥

जाग रे भैजी, दादा-काका अर दीदी
कर उदैँकार अब सैरी दुनिया जगाणी॥४॥

हाथु मा हाथ द्ये, अर खै ल्ये कसम
इत्गया सुन्दर बनाण कि दुनिया दिखाणी॥५॥" 


महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
©सर्वाधिकार सुरक्षित
Date- १५/०७/२०१२

'आज भी' ! (गढ़वाली गजल)


"छणंकदी चूड़ी तेरी, मन मा म्यारा आज भी
रुवाँ सी मुखुड़ी तेरी, रुवांदी आज भी॥१॥

तेरी मेरी माया भणाक न लगु लुकोँ मा
वु पैलु समुण सिराणा च आज भी॥२॥

झुरी-झुरी के निरपट सि ह्वेग्योँ
त्येरी ज्गवाड़ मा बैठ्यूं आज भी॥३॥

माया का स्गवाड़ो मा बोड़्यांदु मि
त्येरी माया तें खोज्यादुं आज भी॥४॥

कै ड़ाणडा कै काण्ठयूं मा होली तू
तेरी माया कु तिस्वाड़ु छौँ आज भी॥५॥"



महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
©सर्वाधिकार सुरक्षि
Date- १५/०७/२०१२

जौगी-च्यला अर पाणी कु भकार !


 "सुणा भै-बन्दोँ
 अब जौगी भी
 चिमटा छंणके के
 कैलास पौँछी गै
 दगड़ मा रुण्दारु ले के

 जौगी आधु गढ़देश कु राजा
 सब्युं मा रुंण्ण वालु दरबेरी
 सुणी मिन की
 यूँ देबदेश मा
 'पाणी कु भकार' धना छन

 अब कु बतालु कि
 डाम हमु तेँ ना
 इनु ते चैणी
 वु भी कपाली मा

 बल बुना युँ कि
 हम बिकास छ कना
 ना.. ना.. ना..
 यूँ त मालदार दगड़ी
 अफणी फाँची बांधणा

 जब जौगी ही
 माया की बात करलु
 त वु अफी ही खालु ना
 रुवै रुवै कै
 भिक्षा माँगण व्लु भी
 सपु ते रुवालु कि ना

 हे शिव जरा
 योँ कि कपाली मा
 एक चड़चड़ु डाम धरा द
 इनारी अकल मा
 जरा सी खारु लगावा द

 जरा बतावा कि
 डैम ही बिकास नि छ
 अर डैम हमारु काम कु नि छ
 हमु ते बिजली चैणी
 पाणी कु भकार से
 हमुन क्या कन।"

 महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
©
सर्वाधिकार सुरक्षित
Date- १५/०७/२०१२

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

कुहेड़ी !





 १.
"सर्रर सर्रर
कुहेड़ी ऐन

सौण-भादो की
फर्रर फर्रर
बथौन
सब उड़ै गै,

जौँ क
मन मा लगी
बारामासी कुहेड़ी
कु बथौ आलु
उड़ै लिजालु सदैनी।"

 २.
"आ कुहेड़ी
लुकै दे
पिरथी सैरी,
कुनजरीयोँक नजर से
कुछ देर त बची रैली।"

 ३.
"कुहेड़ी
जब चलदी
सैड़्यी रैँद धरती
मन मा
लगी कुहेड़ी
हमेश जिकुड़ी जलांदी
हमेश मनखी तपाँन्दी।"


महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद' 
© सर्वाधिकार सुरक्षित
दिंनाक- १२/०७/२०१२

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

फुलोँ की डाई अर काण्ड़ा !




"फुलोँ की डाई दगड़ भी माया लगै के देख्याँ

काण्ड़ा भी तुमु दगड़ी माया लगाली

फूल द फूल ई छन अर रैला

पर काण्ड़ु भी फूल बणी के दिखाली॥"

महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
© सर्वाधिकार सुरक्षित