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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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शनिवार, 26 मई 2012

चखुली जनी माया


"धार-चौबाटा 
सैरा-सौपाटा 
ढ़ैऽपुरी-धुरपाऽड़ा 
गोँ-गोँऽळा-गोरबाटा 
बऽणौँ-बुज्याऽणा 
छानियुँ कोल्यणा
म्येरी चखुली जनी माया 
वीं तेँ खुज्याणी रे
सेरा गौँ
म्यारा नौ कु पिछाड़ी 
बौड़्या लगाणी रे
रात त सदनि आन्द पर 
'आजाद' तेँ जून नि दिखे !"


महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
© सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - २३/०५/२०१