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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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रविवार, 20 मई 2012

मिते माफ़ करी द्याई


पाली-पोषी जौन, ज्वान बनायी
हे! दिदा मिन ऊनु तें,
बुड्या छन मा छोड्यली...

हाथ पकड़ी जौन, मेरी खुट्यो ते समाड़ी
हे! काका मिन ऊनैर,
खुशियोंक टांग टोड्यली...

पढ़े-लिखे जौन, आज काबिल बनायी
हे! बौड़ा मि ऊनु ते,
आज कनके बिसरी ज्ञायी

कभी माया कु लोभ, कभी सुखों का बाना
हे! माँजी लाडु तेरो,
बाटु बिरडी ज्ञायी...

रिटी-रिटिक सैरी पिरथी, जब याद घौर आई
हे! बाबा अब ता,
आजाद गढ़देश फ़र्गी ज्ञायी...

लाडु छौं मि तुमारो, गलती ह्वे ज्ञायी
हे! ब्वै-बाबा मेरा,
मिते माफ करी द्याई...
               
(घौर- घर, फ़र्गी- वापस लौटना)
महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
© सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - १९/०५/२०१२