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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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सोमवार, 7 मई 2012

सुपन्यु मा


"क्वी सुपन्यु मा
ऐ के
सिराणा पे बैठी के
मेरी कन्दुड़यु मा
कुछ बच्यै गै
इनु लगी की
क्वी गीत गुनगुनै गै 

गीत चौमासु मे
माया का
गीत बण-बुग्याड़ु मे
हौँस उलार का
गाड़-गधन्यु मे
बगदी उमाड़ का
क्वी गीत गुनगुनै गै

बथौँ सी बणी के
चखुली दगड़
फुर्र-फुर्र
असमान मा उड़ी गै
झट निन्द भी उड़ी त
डिसाण मा बे भुवाँ पौड़्यू रै
क्वी गीत गुनगुनै गै।"



हेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - ०७/०५/२०१२