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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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बुधवार, 4 अप्रैल 2012

"भरोसु कु उमाल"


"मन कु साथ,
भरोसु कु उमाल
अब खत्यै ग्याई


इक टीस त छैई
जिकुड़ी मा,
उ भी फुर्र उड़ी ग्याई


कु ज्याणी क्या ह्वोलु,
आँख्यू का समोदर मा
पनेरा भी समै ग्याई


कै मे बिगाण,
सहारा द्युण वाड़ा
अब दिलासा द्युण ले राई।"
महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - ०३/०४/२०१२