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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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मंगलवार, 20 मार्च 2012

"कब आलु चैत"

"सोचदी रे बारोँ मैना
कब फूलला बोण्णौँ मा बुराँश
कन ह्वोलु घुघूती को घूर-घूर
कब आलु डाल्यु मा मौल्यार
दिखेली घरिया की पिगंड़ी सारी
पुगंड़्युँ मा फ्योँली का फूल
कफुवा भी बासेली
क्खी रेली स्येड़ा-पातलो मा सिलपुड़ी भी कुमलाई
कन स्वाणुँ दिखेलु मेरु पहाड़
कन स्वाणीँ यख की रीत
आला बाबाजी अलिवार ल्यै के
मैँ ते दगड़ी लिजाला मैत
सभी गैल्याणी आई रेली
खूब हौँस-उलार रलौ
दिन मा खौला निमुआ की खटै
राती मा गौठ भरी के कछेड़ी
सोचदी रेँदी दिशा-ध्याणी
कब आलु चैत
गैल्याणुँ गैल रलु मी मैत।"


महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - १८/०३/२०१२