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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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सोमवार, 19 मार्च 2012

चैत


“घौण्णा बण्णौं मे न जाया चैत का मैना
ऐडि-आंछरी की चलदी व्ख बयाड़,
बैठी के डिंड्याली लगे के मैतियों की आस
अलिवार ल्ये के आला बाबा बैठी रे जग्वाड़।

मैतियों की खातिरदारी खूब करिया
अप्णि मॉ तें भी खीर ब्णै के भेज्या,
सब्युँ की राजी-खुशी जरूर पुछ्या
उनारों आशीर्वाद ल्युण न भूल्या।

बैठी रे दादी दगड़ खूब सेवा भी करया
दादी का औंण-कथा सुण्ण न भूल्या,
लगाया खूब छ्वीं दादी दगड़
मेरी कविताओं ते भी दादी दगड़ बांच्यॉ।

मेरी फिकर न करी लाड़ी
अगिला मैना भेंटुला मी अंग्वाड़,
बैसाख मा देख्या मेरु बाटु
घूमी औला कौतिक भी दाणु मल्याड़।“

महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - १८/०३/२०१२