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गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

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सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

'ह्यूँद'





"ह्यूँद...
अर ह्यूँदी दिनो कु
तैलु चड़चड़ु घाम,
सुबेर र ब्याखुनी कु
फुर्फुरिया बथौँ,
रात इणी पौट मरी जाण
वलु जड़्ड़ू।


मंगसीर कु
सुरसूर्या बथौँ,
पूस कु
घुनघुनयाँ ह्यूँ,
माघ की
घाम तपी खिचड़ी।


वनी ता डाल्युं-बोटो मा
पतझड़ ह्वयूं,
वै मा भी ऐँच बे
सफेद ह्यूँ पड्यू,
धार-खरगा गाड़-गधन्या
सब ह्यूँ भरयु।


ऐ के ह्युंद
विसात छोड़ी गे,
ह्यूँद का दिन
बौड़ी ऐ गे,
ह्यूंद की हिँदोली
जिकुड़ी मा रै गे।"

महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - १५/०२/२०१२