स्कोलल

गढ़वाली कवितायें एवं गीत :- महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

What is website hosting

सोमवार, 9 जनवरी 2012

बौड़ी ऐजा गढ़देशी


डांडी-कांठी धै लगाणी
रौड़ी-दौड़ी तू ऐ
ज्यू नि लग्दु त्वे बिगेर
प्न्देरी भी खुदेणी रे॥१॥

सैरा-सोपाटा, गौं-डिंड्याली
त्येरु बाटु देखणा चा
बौडी ऐजा मेरा लाटा
उरख्याली धाद लगाणी चा॥२॥ 

कफुवा-घिनुडी अर घुघुति
त्यारा ही गीत गान्दा
गुणी-बाँदर की टोली भी
त्वे ते ही टोक मारदा॥३॥

काखड़ी-मुंगरी, गौं का अल्वाड़
त्येरी खुट्यो ते जुगाया
नारेणो मंदिर अर भगवती थान
त्येरी पुज़्ये ते रुसाया॥४॥

निस धार मा त्येरी कुड़ी-बाड़ी
खोज्याणी च आज त्वे ते
कुड़ी-बाड़ी यख खेली के
सुपन्यु ते किले बिसरी गै॥५॥

गौं की पधानी बौडी
त्येरी छ्वीं लगाणी च
किले नि आणु मास्ता तू घौर
पूरा गौं गयाणु च॥६॥

माँ, त्यारा बाबू भी
अब आंशु नि पौछ्दा
इन आंशुओ की गाड़ मा
त्येरी मुखुदी देखदा॥७॥

बौड़ी ऐजा म्यारा गढ़देशी
यों गढ़देश ते त्येरी जरूरत चा
रौड़ी-दौड़ी ऐजा परदेशी
'आज़ाद' भी अब घौर जाण्यु चा॥८॥



महेन्द्र सिँह राणा 'आजाद'
 © सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनाँक - २०/१२/२०११